Saturday, August 7, 2021

vertigo चक्कर आना


आज हम बात करेंगे चक्कर आने पर चक्कर आना यह कैसी सामान्य परिस्थिति है जिससे हर व्यक्ति जीवन में कभी न कभी पीड़ित जरूर होता है और कई बार ऐसा होता है कि हमारे आसपास में जो भी हमारे जानकार रहते हैं उनमें से किसी ना किसी को चक्कर आते रहते हैं और हम उनको अलग-अलग इलाज बताते रहते हैं लेकिन सही बात हमें नहीं पता होती आज हम बात करेंगे इसके बारे में कि यह किस लिए आते हैं और इनके होम्योपैथिक निदान क्या है यह जो आप यह किसी भी  किसी भी चिकित्सक अल्टरनेटिव नहीं है यह पोस्ट आपकी जानकारी के लिए है कि आपको पूरी जानकारी मिल सके परंतु यह किसी भी चिकित्सक को रिप्लेस नहीं कर सकती है आपने कभी भी अपना इलाज कराना है तो पूर्ण रूप से चिकित्सक से करें बाकी आप सभी जानकारी के लिए इश्क पोस्ट को ध्यान से सुने मैं डॉक्टर अमित जैन आज आपको वर्टिगो चक्कर आना के विषय में जानकारी देने की पूरी कोशिश करूंगा 
 चक्कर आना
(Vertigo or Giddness)
     जब     रोगी को ऐसा महसूस होता है कि उसका सिर घूम रहा है, जबकि वह स्थिर अवस्था में होता है, ऐसी अवस्था को चक्कर आना कहते हैं। रोगी स्वयं को चक्कर खाते या अपने आस-पास की वस्तुओं को घूमता हुआ देखता है। यह स्थिति लगभग 30 सेकण्ड में मिट जाती है।

 इसका कारण बहुत सारे है जैसे  :-

जब रोगी ऐसा महसूस करता है कि उसके आस-पास की चीजें घूम रही है तब चक्कर आने लगते हैं।
गर्दन में दर्द होने के कारण चक्कर आ सकता है।
कभी-कभी ट्यूमर रोग के कारण भी चक्कर आ जाता है।
कान में दर्द या कान से पीब बहने के कारण चक्कर आ सकता है।
शरीर में उच्चरक्त चाप होने पर चक्कर आने लगता है।
मैनिया रोग, कान में जलन तथा डर लगने के कारण भी चक्कर आ सकता है।
धमनियों के कठोर हो जाने पर चक्कर आने लगता है।
सर्विकल स्पाडोलाइसिस का स्नायुओं पर दबाव पड़ना।
चक्कर आने के लक्ष्ण क्या है ,आप कैसे जानोगे की चक्कर आ रहे है  :-

          चक्कर आने पर रोगी को ऐसा लगता है कि उसके आस-पास की सारी चीजें घूम रही है, कानों में घंटियां बजने जैसी आवाजें सुनाई पड़ने लगती है, डर लगता है। रोगी को अचानक चक्कर आने का बोध (ज्ञात) होता है। इस प्रकार की स्थिति कुछ ही मिनटों में ठीक हो जाती है। कभी-कभी संतुलन खाने की स्थिति भी पैदा हो जाती है। इस रोग के कारण शरीर के कई अंगों में सुन्नपन, आंखों की दृष्टि धुंधली पड़ जाती है, लकवा, सही संतुलन न बना पाना आदि लक्षण भी दिखाई पड़ते हैं।

चक्कर आने पर क्या करें और क्या न करें :-

चक्कर आने पर इसके लक्षणों को नज़र अंदाज न करें।
रोग का अपने आप चिकित्सा न करें।
इस रोग से पीड़ित रोगी को किसी अच्छे चिकित्सक से सलाह लेकर अपना उपचार कराना चाहिए।
ऐसे चिकित्सक से उपचार कराना चाहिए जो कान के रोगों के बारे में अच्छी तरह से जानता हो क्योंकि हो सकता है कि किसी प्रकार के कान के रोग के कारण चक्कर आ रहा हो।
अपने रक्तचाप की जांच करा लें क्योंकि इससे पता चल जाऐगा कि कहीं रक्त चाप तो नहीं बढ़ गया है।
उपचार कराते समय जरूरत पड़े तो सी.टी. स्कैन करा लें।
सिर में किसी प्रकार से झटका लगने से बचें।
भोजन में विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स तथा अन्य विटमिनों का प्रयोग करना चाहिए।
निश्चित समय पर भोजन करें तथा स्वास्थ्य नियम का पालन करें।
प्रतिदिन व्यायाम तथा योग-ध्यान करने से लाभ मिलता है।
अधिक दूरी तक तैरना, वाहन चलाना या ऊंचाई पर न चढ़े जब तक कि कोई ऐसा व्यक्ति आपके साथ न हो जिसे आपकी इस बीमारी के बारे में पता हो तब तक ऐसा न करें।
उच्च रक्तचाप को कम करने की दवाइयां न लें इससे हानि हो सकती है।
जब तक कोई चिकित्सक न कहे तब तक किसी प्रकार की दवाई का सेवन न करें।
यदि रक्तचाप बढ़ गया हो तो बैठी हुई अवस्था से अचानक खड़े न हो।
कोई भी कार्य झटके के साथ न करें।
रोगी को तब तक कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए जब तक कि कोई आपके कार्य पर ध्यान न रखें।
रोगी को उत्तेजक पदार्थ कभी भी नहीं खाना चाहिए।
ठण्डे पानी से स्नान करना चाहिए।
रोगी को जल्दी पचने वाली और पौष्टिक भोजन का सेवन करना करना चाहिए।
चक्कर आने की विभिन्न  होम्यो औषधियों से चिकित्सा को ध्यान से सुने ,ये आपकी जानकारी के लिए है ,हर दवाई के साथ उसके लक्ष्ण बताये गए है  किर्पया अपना इलाज किसी चिकित्सक से ही करवाए  -

चक्कर आने की औषधी नंबर 1. जेल्सीमियम-  रोगी के सिर के पीछे चक्कर आता है, नीचे की गति में चक्कर आता है। इस प्रकार के चक्कर को दूर करने के लिए जेल्सीमियम औषधि  का उपयोग कर सकते हैं।

चक्कर आने की औषधी नंबर 2. ग्रेनेटम- यदि रोगी को चक्कर लगातार आ रहा हो तो ग्रेनेटम औषधि  उपचार करना चाहिए। इसका उपयोग दिन में तीन बार करना चाहिए।

 चक्कर आने की औषधी नंबर 3. फॉसफोरस- किसी भी प्रकार का चक्कर आ रहा हो तो फॉसफोरस औषधि  का उपयोग करना लाभकारी है। यदि रोगी को स्नायुविक चक्कर आ रहा हो तो उपचार करने के लिए फॉसफोरस औषधि का उपयोग कर सकते हैं। इस प्रकार के चक्कर स्नायुविक कमजोरी, अधिक संभोग क्रिया करने, वीर्य नष्ट होने या खाली पेट रहने के कारण से होता है। वृद्ध व्यक्तियों को चक्कर आ रहा हो तो उनके इस रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि के द्वारा उपचार करना चाहिए।

चक्कर आने की औषधी नंबर 4. बोरैक्स-  नीचे की गति करने अर्थात सीढ़ी या किसी भी ऊंचे स्थान से नीचे उतरते समय चक्कर आ रहा हो तो बोरैक्स औषधि  का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है। इस प्रकार के लक्षण को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का भी उपयोग कर सकते हैं।

चक्कर आने की औषधी नंबर 5. नैट्रम म्यूर- जब रोगी बैठी हुई अवस्था में होता है तो उसे चक्कर आता है तथा इसके साथ ही उसे कब्ज की समस्या भी होती है। जब रोगी अपनी आंखों को बंद करता है तो उसे पसीना आने लगता है, दिन हो या रात पसीना आता है। ऐसे रोगी के रोग का उपचार करने के लिए नैट्रम म्यूर औषधि का उपयोग करने से फायदा मिलता है।

चक्कर आने की औषधी नंबर 6. कैलकेरिया कार्ब-  ऊपर देखने या ऊंचाई पर चढ़ने से चक्कर आ रहा हो तो उसे ठीक करने के लिए कैलकेरिया कार्ब औषधि  का प्रयोग करना लाभकारी है।

चक्कर आने की औषधी नंबर 7. बेलाडोना-  सोकर उठने पर चक्कर आना या बिस्तर पर करवट बदलते समय चक्कर आने पर कष्ट को दूर करने के लिए बेलाडोना औषधिक  का प्रयोग करने से अधिक लाभ मिलेगा।

चक्कर आने की औषधी नंबर 8. कोनायम- बैठी हुई अवस्था से लेटने पर या उठने पर चक्कर आ रहा हो तो कोनायम औषधि  का उपयोग करना लाभकारी होता है। जो वृद्ध व्यक्ति तंबाकू का सेवन करते हैं उन्हें चक्कर आ रहा हो तो उनके इस रोग को ठीक करने के लिए कोनायम औषधि का उपयोग किया जा सकता है। यदि रोगी किसी वस्तु को एक-टक करके देखता है तो ऐसा लगता है कि वह गोलाई में घूमने लगा है। ऐसे रोगी के इस लक्षण को कोनायम औषधि के द्वारा ठीक कर सकते हैं। यदि रोगी ऊपर से नीचे की ओर जाता है या बिस्तर पर करवटें बदलता है तो उसे चक्कर आता है। रोगी को अधिक कमजोरी महसूस होती है तथा सोने का अधिक मन करता है। ऐसे रोगी के कष्ट को दूर करने के लिए कोनायम औषधि का उपयोग करना चाहिए।

चक्कर आने की औषधी नंबर 9. नक्स वोमिका तथा सल्फर-  यदि रोगी का पेट खराब है, अपचन तथा कब्ज होने के साथ ही चक्कर आ रहा हो तो इस रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि  का उपयोग करना चाहिए तथा इसके बाद सल्फर औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करें।

चक्कर आने की औषधी नंबर10. चायना- खून बह जाने, अधिक वीर्य नष्ट होने या शरीर में अधिक कमजोरी होने के कारण चक्कर आ रहा हो तो उपचार करने के लिए चायना औषधि  का उपयोग करना लाभदायक होता है।

चक्कर आने की औषधी नंबर11. ब्रायोनिया-  लेटी हुई अवस्था से उठने पर तथा हाथ-पैरों को चलाने से चक्कर आ रहा हो तो इस कष्ट को दूर करने के लिए ब्रायोनिया औषधि की  उपयोग करने से फायदा मिलता है।

चक्कर आने की औषधी नंबर 12. कौक्कयुलस- यदि स्नायुओं की उत्तेजना के कारण सिर की गुद्दी में दर्द तथा चक्कर हो तो कौक्कयुलस औषधि  से उपचार कर सकते हैं। इस औषधि का प्रभाव नाभि के पीछे के स्नायुमंडल तथा मेरुदंड पर होता है। बस, गाड़ी में चढ़ने पर या पहाड़ों पर चढ़ने से चक्कर आने पर यह औषधि उपयोगी है। भोजन के बाद यदि बस, नाव, गाड़ी या जहाज आदि पर चढ़ने पर जी मिचलाने के साथ चक्कर आ रहा हो तो कौक्कयुलस औषधि से उपचार करना लाभदायक होता है।

चक्कर आने की औषधी नंबर 13. फेरम मेट- शरीर में खून की कमी होने के कारण चक्कर आना, बैठे या लेटे हुए स्थिति से उठकर खड़े होने पर चक्कर आना, पहाड़ी से नीचे जाते समय चक्कर आना। इस प्रकार के लक्षण होने पर उपचार करने के लिए फेरम मेट औषधि  मात्रा का उपयोग किया जाता है।

चक्कर आने की औषधी नंबर 14. थेरीडियन- जब रोगी आंखे बंद करता है तो उसे चक्कर आने लगता है। ऐसे रोगी के इस लक्षण को थेरीडियन औषधि  ठीक कर देती है।

चक्कर आने की औषधी नंबर 15. ऐम्ब्रा ग्रीसिया- वृद्ध व्यक्ति के चक्कर आने पर इस रोग को ऐम्ब्रा ग्रीसिया औषधि  ठीक कर सकती है।

चक्कर आने की औषधी नंबर 16. कॉस्टिकम- लकवा रोग होने से पहले चक्कर आना तथा इसके साथ ही रोगी में सामने या एक तरफ गिरने के लक्षण होना। ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए इस औषधिका सेवन करने से अत्यंत लाभ मिलता है।

चक्कर आने की औषधी नंबर 17. अर्जेन्टम नाइट्रिकम- रोगी जब गली में चलता है तो वह सोचता है कि सामने के मकान उस पर न गिर जाए, इस सोच के कारण उसे चक्कर आने लगता है या बहते हुए पानी को देखकर चक्कर आने लगता है। ऐसे रोगी का उपचार करने के लिए अर्जेन्टम नाइट्रिकम औषधि की  का उपयोग लाभकारी होगा।

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